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सकट चौथ आज: कैसे कुपोषण के खिलाफ एक अभियान बन जाता है गणेशजी का यह व्रत

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Sakata Chauth 2026
January 6, 2026

Sakata Chauth 2026

Understanding Sakata Chauth 2026

भारत में व्रत सिर्फ़ पूजा नहीं होते, ये पीढ़ियों से चली आ रही जीवनशैली और सामाजिक समझ का हिस्सा हैं।
सकट चौथ (जिसे तिलकुटा चौथ या माघी चौथ भी कहा जाता है) ऐसा ही एक व्रत है, जो आज के दौर में सिर्फ़ धार्मिक नहीं, बल्कि कुपोषण के खिलाफ एक साइलेंट मूवमेंट बनकर सामने आता है।
इस साल, Sakata Chauth 2026 का महत्व और भी बढ़ गया है।

सकट चौथ क्या है?

सकट चौथ माघ मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाया जाता है।
यह व्रत विशेष रूप से माताएं अपने बच्चों की लंबी उम्र, स्वास्थ्य और बुद्धि के लिए करती हैं।
इस दिन चंद्रमा के दर्शन के बाद भगवान गणेश की पूजा की जाती है।

सकट चौथ 2026 में, माताएं इस दिन Sakata Chauth 2026 का उपवास करके अपने बच्चों के लिए स्वास्थ्य और समृद्धि की कामना करती हैं।

परंपरा कहती है – जहाँ गणेश हैं, वहाँ विघ्न नहीं टिकते।


व्रत, आहार और पोषण – एक छुपा हुआ विज्ञान

आज हम कुपोषण को आधुनिक समस्या मानते हैं, लेकिन हमारे शास्त्र पहले से इसका हल बता चुके हैं।

इस वर्ष Sakata Chauth 2026 का पालन विशेष रूप से ध्यान देने योग्य है।

सकट चौथ के पारंपरिक प्रसाद पर ध्यान दीजिए:

  • तिल (Sesame seeds) – कैल्शियम, आयरन और हेल्दी फैट से भरपूर

    यह Sakata Chauth 2026 का खास प्रसाद है, जो हर माता-पिता द्वारा अपने बच्चों के लिए तैयार किया जाता है।

  • गुड़ – आयरन का नैचुरल स्रोत

  • मूंगफली, चना, सत्तू – प्रोटीन और एनर्जी का पावरहाउस

  • फल और दूध – विटामिन व मिनरल्स का संतुलन

👉 ये वही चीज़ें हैं, जिन्हें आज न्यूट्रिशन एक्सपर्ट “सुपरफूड” कहते हैं।

मतलब साफ है —
सकट चौथ का व्रत = धार्मिक अनुशासन + पोषण संतुलन

 

Sakata Chauth 2026


मातृत्व और कुपोषण का सीधा कनेक्शन

इस Sakata Chauth 2026 पर, हमें अपने बच्चों के पोषण को भी ध्यान में रखना चाहिए।

भारत में बच्चों का पोषण सीधे मां के आहार और सोच से जुड़ा है।
सकट चौथ में मां:

  • खुद उपवास रखती है

  • सात्विक भोजन अपनाती है

    इस तरह, Sakata Chauth 2026 का व्रत माता-पिता और बच्चों के बीच एक मजबूत संबंध स्थापित करता है।

  • बच्चे के लिए प्रार्थना करती है

ये सब मिलकर मां को जागरूक बनाते हैं, और यही जागरूकता कुपोषण के खिलाफ सबसे बड़ा हथियार है।

आज NGO और सरकार जिस “मदर अवेयरनेस” की बात करती है,
वही काम हमारी परंपराएं सदियों से कर रही हैं


सकट चौथ का यह विशेष साल, Sakata Chauth 2026, हमें स्वास्थ्य और पोषण के महत्व का याद दिलाता है।

गणेशजी: सिर्फ़ विघ्नहर्ता नहीं, पोषण के भी प्रतीक

गणेशजी का स्वरूप ही बहुत कुछ सिखाता है:

  • बड़ा पेट → अच्छा पाचन

  • हाथ में मोदक → संतुलित आहार

  • चूहे की सवारी → सीमित संसाधनों में भी जीवित रहने की कला

    इस Sakata Chauth 2026 पर, हमें अपने जीवन में संतुलन लाने की आवश्यकता है।

यानी गणेशजी का पूजन हमें सिखाता है:

“कम में भी संतुलन हो, तो जीवन स्वस्थ रहता है।”


आज के समय में सकट चौथ का संदेश

आज जब:

  • जंक फूड बढ़ रहा है

  • बच्चों में कमजोरी आम हो रही है

  • मां-बाप समय से खाना नहीं खा पा रहे

तब सकट चौथ हमें याद दिलाता है:

  • सादा खाओ

  • समय पर खाओ

  • सात्विक खाओ

  • और भगवान को याद करके खाओ

ये सिर्फ़ भक्ति नहीं, लाइफस्टाइल सुधार है।


निष्कर्ष (सीधी बात)

सकट चौथ कोई पुरानी रस्म नहीं है।
यह भारत का देसी न्यूट्रिशन मिशन है, जो बिना शोर के काम करता है।

इस बार, Sakata Chauth 2026 हमें नई ऊर्जा और दृढ़ता देने वाला है।

अगर हम परंपरा को समझें, न कि छोड़ें —
तो कुपोषण जैसी समस्याएं खुद-ब-खुद कमजोर पड़ जाएंगी।

🙏 गणपति बप्पा मोरया
स्वास्थ्य, बुद्धि और समृद्धि सबको मिले।

🌙 सकट चौथ की चांदनी

गांव की कच्ची गली में चूल्हे की आँच धीमी थी।
सीमा आज कुछ नहीं खा रही थी।
आंगन में बैठा उसका बेटा आरव बार-बार पूछ रहा था,
“माँ, आज खाना क्यों नहीं खा रही हो?”

सीमा मुस्कुराई,
“आज गणेशजी के लिए व्रत है बेटा… ताकि तू हमेशा स्वस्थ रहे।”

शाम ढलते-ढलते उसने तिल, गुड़ और मूंगफली से प्रसाद बनाया।
आरव ने पहला कौर खाया और बोला,
“माँ, ये तो बहुत ताकत वाला लगता है!”

सीमा की आँखें भर आईं।
उसे नहीं पता था कि किताबों में इसे पोषण कहते हैं,
पर परंपरा ने उसे सिखा दिया था
कि सादा खाना ही असली दवा है।

गणेशजी की कृपा से, Sakata Chauth 2026 स्वस्थ जीवन का प्रतीक बनेगा।

चांद निकला।
सीमा ने गणेशजी को प्रणाम किया और आरव को सीने से लगा लिया।

उस रात आरव गहरी नींद सोया,
और सीमा को लगा—
आज गणेशजी ने सिर्फ़ विघ्न नहीं,
कुपोषण भी दूर कर दिया।
🌾🙏

श्री गणेश जी की संकटा चतुर्थी कथा

बहुत समय पहले की बात है। एक गांव में एक गरीब ब्राह्मण परिवार रहता था। घर में धन नहीं था, पर भक्ति की कमी नहीं थी। उस परिवार की एक संतान थी, जो बचपन से ही बहुत कमजोर और बार-बार बीमार पड़ जाती थी।

मां हर दिन भगवान गणेश से प्रार्थना करती—
“हे विघ्नहर्ता! मेरे बच्चे के जीवन के सारे संकट हर लीजिए।”

एक दिन माघ महीने की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी आई। उसी रात सपने में मां को भगवान गणेश के दर्शन हुए।
गणेश जी ने कहा—
“माघ कृष्ण चतुर्थी को संकटा चतुर्थी का व्रत रखो। दिन भर उपवास करो, तिल-गुड़ का भोग लगाओ और चंद्रमा के दर्शन के बाद पूजा करो। तुम्हारे संकट दूर होंगे।”

यह Sakata Chauth 2026 का व्रत, सभी कठिनाइयों को दूर करने में सहायक होगा।

अगले दिन मां ने पूरी श्रद्धा से व्रत रखा। घर में कुछ नहीं था, फिर भी उसने तिल, गुड़ और थोड़ा सा चावल जुटा लिया।
रात को जब चंद्रमा निकला, उसने दीप जलाया, गणेश जी की पूजा की और अपने बच्चे को गोद में लेकर प्रार्थना की।

उसी रात एक चमत्कार हुआ।
बच्चा जो हमेशा बीमार रहता था, वह पहली बार चैन की नींद सोया।
दिन बीते, महीने बीते—
वह बालक धीरे-धीरे स्वस्थ और तेजस्वी होने लगा।

गांव वालों ने पूछा,
“माता, ऐसा क्या किया आपने?”

मां ने कहा—
“मैंने कुछ नहीं किया।
मैंने सिर्फ़ गणेश जी पर भरोसा किया और संकटा चतुर्थी का व्रत रखा।”

तभी से यह मान्यता चली आई कि
जो भी श्रद्धा से संकटा चतुर्थी का व्रत करता है,
भगवान गणेश उसके जीवन के सभी संकट हर लेते हैं
चाहे वह रोग हो, संतान कष्ट हो या धन की परेशानी।


🌼 कथा का संदेश

इस बार Sakata Chauth 2026 में, हम सभी को श्रद्धा और विश्वास के साथ आगे बढ़ना चाहिए।

जहाँ श्रद्धा होती है, वहाँ गणेश जी स्वयं रास्ता बनाते हैं।
और जहाँ गणेश होते हैं, वहाँ संकट टिक नहीं पाते।

🙏 गणपति बप्पा मोरया

 

Sakata Chauth 2026

Sakata Chauth 2026

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