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What Is Utpanna Ekadashi Vrat, एकादशी व्रत के नियम एवं पौराणिक कथा

एकादशी व्रत Ekadashi Vrat की शुरुआत उत्पन्ना एकादशी Utpanna Ejkadashi से क्यों करनी चाहिए ?

सालभर में कुल 24 एकादशी के व्रत ekadashi vrat पड़ते हैं | सभी एकादशियों के नाम और महत्व भी अलग अलग हैं | आमतौर पर जब किसी को एकादशी व्रत ekadashi vrat रखना होता है, तो वो किसी भी शुक्ल पक्ष की एकादशी से इस व्रत की शुरुआत कर देते हैं| लेकिन वास्तव में एकादशी व्रत ekadashi vrat की शुरुआत उत्पन्ना एकादशी utpanna ekadashi से करनी चाहिए| इसे ही पहली एकादशी माना जाता है|

व्रतों में सर्वाधिक महत्वपूर्ण व्रत एकादशी ekadashi का होता है| एकादशी का नियमित व्रत रखने से मन कि चंचलता समाप्त होती है धन और आरोग्य की प्राप्ति होती है| हारमोन की समस्या भी ठीक होती है तथा मनोरोग दूर होते हैं | उत्पन्ना एकादशी utpanna ekadashi का व्रत आरोग्य, संतान प्राप्ति व मोक्ष के लिए किया जाने वाला व्रत है | ये व्रत रखने से हर प्रकार की मानसिक समस्या को दूर किया जा सकता है.|

ऐसी मान्यता है कि उत्पन्ना एकादशी का व्रत रखने से मनुष्यों के पिछले जन्म के पाप भी नष्ट हो जाते हैं | आइए आपको इसका महत्व, पूजन विधि और मुहूर्त के बारे में बताते हैं | उत्पन्ना एकादशी utpanna ekadashi का व्रत मार्गशीर्ष माह की कृष्ण पक्ष की एकादशी को रखा जाता है | merikundli.com

Utpanna Ekadashi उत्पन्ना एकादशी व्रत के नियम :-

उत्पन्ना एकादशी Utpanna ekadashi का व्रत दो तरह से रखा जाता है | ये व्रत निर्जला और फलाहारी या जलीय ही रखा जाता है | निर्जल व्रत को स्वस्थ्य व्यक्ति को ही रखना चाहिए| अन्य लोगों को फलाहारी या जलीय व्रत रखना चाहिए | इस व्रत में दशमी को रात में भोजन नहीं करना चाहिए | एकादशी ekadashi को सुबह श्री कृष्ण की पूजा की जाती है | इस व्रत में सिर्फ फलों का ही भोग लगाया जाता है | इस दिन केवल जल और फल का ही सेवन किया जाता है |

Utpanna Ekadashi उत्पन्ना एकादशी के विशेष प्रयोग :-

प्रातः काल पति पत्नी संयुक्त रूप से श्री कृष्ण की उपासना करें | उन्हें पीले फल, पीले फूल, तुलसी दल और पंचामृत अर्पित करें. इसके बाद संतान गोपाल मंत्र का जाप करें. मंत्र होगा

– “ॐ क्लीं देवकीसुत गोविन्द वासुदेव जगत्पते, देहि मे तनयं कृष्ण त्वामहं शरणम गता.” पति पत्नी एक साथ फल और पंचामृत ग्रहण करें|

उत्पन्ना एकादशी की पौराणिक कथा :-

सतयुग में एक बार मुरु नामक राक्षस ने देवताओं पर विजय प्राप्त कर देवताओ के राजा इंद्र को बंधक बना लिया । तब सभी देवता गण भगवान भोलेनाथ की शरण में पहुंच गए। सदाशिव भोले नाथ ने देवताओं को श्री हरि विष्णु जी के पास जाने की सलाह दी।

उसके बाद समस्त देवता गण श्री हरि विष्णु जी के पास जाकर अपनी सारी व्यथा सुनाई। ये सब सुनने के बाद श्रीहरि विष्णु जी ने सभी राक्षसों को तो परास्त कर दिया, परंतु दैत्य राजा मुरु वहां से भाग निकला। श्रीहरि विष्णु ने दैत्य मुरु को भागता देख उसे जाने दिया | स्वयं बद्री नाथ आश्रम की गुफा में विश्राम करने लगे। उसके कुछ दिनों के बाद दैत्य मुरु भगवान विष्णु जी को मारने के उद्देश्य से वहां पहुंच गया। तब श्री हरि विष्णु जी के शरीर से एक स्त्री की उत्पत्ति हुई।

उत्पन्न हुई उस स्त्री ने मुरु दैत्य को मार डाला तथा देवताओं को भय मुक्त किया। भगवान श्रीहरि विष्णु के अंश से उत्पन्न होने के कारण श्री विष्णु जी ने प्रसन्न होकर उस कन्या को वरदान देते हुए कहा कि संसार के मोह माया के जाल में उलझे हुए समस्त जनों को, जो मुझसे विमुख हो गए हैं, उन्हें मुझ तक लाने में आप सक्षम रहेंगी | आपकी पूजा- अर्चना और भक्ति करने वाले भक्त हमेशा समस्त भौतिक एवं आध्यात्मिक सुख से परिपूर्ण होकर सदगति को प्राप्त करेंगे । Read more…

श्री हरि विष्णु से उत्पन्न होने के कारण इस व्रत का नाम उत्पन्ना utpanna ekadashi पड़ा |

5 Lucky Zodiac Sign In Horoscope 2023 Gemini, Scorpio, Taurus, Libra And Leo

Horoscope 2023 में भाग्यशाली रहेंगे पांच ज्योतिषीय संकेत (Zodiac Sign)-

हम में से अधिकांश के लिए, 2023 किसी भी अन्य वर्ष की तरह ही एक कड़वा मीठा वर्ष होगा। राशि चक्र का प्रत्येक चिन्ह सुख और दुख दोनों चरणों का अनुभव करेगा। हमारी कोई भी कुंडली kundli यह संकेत नहीं देती है कि चुनौतियों के बावजूद आनंद हमसे दूर हो जाएगा। परिणामस्वरूप, कुछ राशियों Zodiac signs के लिए 2023 में शुभ फल प्राप्त होंगे |

क्या आप सवाल करना शुरू कर रहे हैं कि क्यों या कैसे यह जानना कि आपके पक्ष में मौका होगा या नहीं? हम आपके साथ तर्क पर चर्चा करेंगे। अगले वर्ष 2023 में भाग्य आपके लिए कैसे कार्य करेगा, इसका एक ठोस विचार आपके लिए खेल को बदल सकता है। आपके जीवन के सभी पहलू, चाहे वे व्यक्तिगत, पेशेवर, वित्तीय या स्वास्थ्य संबंधी हों, अंततः आपके भाग्य द्वारा निर्धारित किए जाते हैं। इसके अतिरिक्त, यह देखना कि 2023 में भाग्य आपके पक्ष में होगा या नहीं, हो सकता है कि आपको अपने जीवन में पूर्ण 180-डिग्री मोड़ लेने की आवश्यकता हो। हमारे कुशल ज्योतिषियों astrologer ने 2023 के लिए भाग्यशाली राशियों के लिए एक सटीक राशिफल Horoscope तैयार किया है जो न केवल आपको भविष्य का अनुमान लगाने में मदद करेगा बल्कि आपको सही दिशा भी बताएगा।

1. Horoscope Libra Zodiac Sign 2023- (तुला राशि)

2023 में तुला राशि Libra Sign प्रेम, सौभाग्य और सफलता पाने की सबसे अधिक संभावना वाली ज्योतिषीय राशि Astrology Zodiac होगी। 23 सितंबर से 22 अक्टूबर के बीच जन्म लेने वाले लोग राशि चक्र की सातवीं राशि तुला Libra के अधीन होते हैं। ये लोग बहुतायत, सौंदर्य और प्रेम के ग्रह, शुक्र के प्रभाव में हैं, जो वायु राशि पर भी हावी है। वार्षिक राशिफल Horoscope 2023 के अनुसार तुला राशि वालों के लिए यह साल शानदार रहेगा। आपके जीवन के लगभग हर पहलू में जबरदस्त प्रगति और नए अवसर देखने को मिलेंगे। अधिकांश समय, आप अपने उद्देश्यों का पीछा करेंगे और नई चीजों को आजमाने के लिए प्रेरित महसूस करेंगे। महत्वपूर्ण जीवन परिवर्तनों के परिणामस्वरूप आपकी तेजी से प्रगति करने की क्षमता बढ़ेगी। आर्थिक रूप से और अपने गृह जीवन दोनों के मामले में, आपको बहुत लाभ होगा। आप वित्तीय लाभ के साथ-साथ नौकरी के संभावित अवसरों की कतार में रहेंगे।

2. Horoscope 2023- Scorpio Zodiac Sign (वृश्चिक राशि)

वृश्चिक राशि Scorpio Zodiac Signके लिए 2023 का वार्षिक राशिफल इंगित करता है कि यह वर्ष वृश्चिक राशि Scorpio Sign वालों के लिए बहुत अच्छा होगा। अपने जीवन के हर पहलू में, आप पूरी तरह से नई संभावनाओं और जबरदस्त सफलताओं का सामना करेंगे। आप में से अधिकांश अपने उद्देश्यों की दिशा में काम करेंगे और नए निर्णय लेने के लिए प्रेरित महसूस करेंगे। महत्वपूर्ण जीवन परिवर्तनों के परिणामस्वरूप आपकी तेजी से प्रगति करने की क्षमता बढ़ेगी।
आपकी कुंडली में रणनीतिक रूप से व्यवस्थित ग्रहों के लिए धन्यवाद, आप अपने जीवन में किसी भी कमी का अनुभव नहीं करेंगे। आप वित्तीय लाभ के साथ-साथ संभावित काम के अवसरों की कतार में रहेंगे। वर्ष Annual Horoscope 2023 के वार्षिक राशिफल  के अनुसार तुला राशि वालों के लिए यह वर्ष शानदार रहेगा। बहुराष्ट्रीय कंपनियों द्वारा नियोजित मूल निवासियों को अतिरिक्त प्रशिक्षण के लिए विदेश जाने और अपने करियर विकल्पों का विस्तार करने का मौका मिलेगा।

3. Leo Zodiac Sign 2o23- सिंह राशि

इस साल आपके पास बहुत सारे बेहतरीन अवसर होंगे, और आपको हर एक का लाभ उठाने की योजना बनानी चाहिए। व्यस्त और सक्रिय वर्ष के लिए उसी के अनुसार खुद को तैयार करें। आप भाग्यशाली हैं, इसलिए यदि यह आवश्यक है, तो किसी चीज़ में अपना विश्वास रखने में संकोच न करें। इस साल आप जो भी लैंडिंग करेंगे, लियो, बेदाग होगा। लेकिन सावधान रहें कि अपने काम की गुणवत्ता में केवल इसलिए कंजूसी न करें क्योंकि 2023 आपके भाग्य के संकेत के अंतर्गत आता है। जीवन में सफलता के स्तर को बढ़ाने के लिए कड़ी मेहनत करें। करियर की दृष्टि से 2023 आदर्श वर्ष है। इसके परिणामस्वरूप सार्वजनिक और निजी क्षेत्रों में लाखों नए रोजगार सृजित होंगे। हर दावेदार की उम्मीदें पूरी होंगी। मूल रूप से, आप इस साल किसी से मिलेंगे और प्यार में सिर के बल गिर जाएंगे।

4. Gemini Zodiac Sign2023- मिथुन राशि

पूर्वानुमान बताते हैं कि Horoscope 2023 आपके सबसे भाग्यशाली वर्षों में से एक होगा। इस वर्ष, आप अपने सभी उद्देश्यों को महसूस करना शुरू कर देंगे। इसलिए, यदि आपके पास लक्ष्यों की एक सूची है, तो अभी से उन पर काम करें। ऐसी कई चीजें हैं जिन्हें आप हासिल करना चाहते हैं। यह भाग्यशाली वर्ष आपको अपने उद्देश्यों को पूरा करने में मदद करेगा, चाहे वे नौकरी में पदोन्नति पाने के लिए हों, अपने साथी से आपसे शादी करने के लिए कहें, या एक अंतर्राष्ट्रीय शिक्षा प्राप्त करें। अब और 202 की चिंता मत करो; खुश रहो! चूंकि 2023 आपके साथ काफी अच्छा व्यवहार करेगा, इसलिए आपने अब तक जो कुछ भी सीखा है, उसका लाभ उठा सकते हैं।
वर्ष 2023 व्यापार के लिए लाभदायी और लाभदायक सिद्ध होगा। यह वर्ष आपके बच्चों, आपके घर और आपके वित्त के लिए आशाजनक दिख रहा है, जबकि 2023 आपके लिए कई तरह के परिणाम लेकर आएगा।

5. Taurus Zodiac Sign 2023- वृषभ राशि

According to horoscope 2023 में आप एक शानदार शुरुआत करेंगे। इसलिए हो सकता है कि आप अपने कार्यों को प्रभावी ढंग से योजना और शेड्यूल कर सकें। हमारा सुझाव है कि आप वर्ष की शुरुआत में आने वाले वर्ष के लिए कोई महत्वपूर्ण विकल्प चुनें। 2023 के पहले कुछ महीने अपने महत्वपूर्ण दूसरे से शादी का प्रस्ताव रखने या एक नए निवास में जाने का सबसे अच्छा समय है। इसके परिणामस्वरूप आपके सभी प्रयास सफल होंगे।
वर्ष की शुरुआत में आप विशेष रूप से भाग्यशाली महसूस नहीं करेंगे, लेकिन इससे खुद को विचलित न होने दें। आपको अपना अवसर मिलेगा। ज्यादातर लोग अचानक निर्णय लेने से डरते हैं, जो आपकी स्थिति में पूरी तरह गलत है। इस वर्ष आपका आर्थिक भाग्य बहुत अच्छा नहीं रहेगा, लेकिन आपका प्रेम जीवन शानदार रहेगा। वह व्यक्ति आपके जीवन में बदलाव लाएगा। यदि आप अपने प्रेम जीवन को बदलते हैं, तो आप सभी क्षेत्रों में अपनी किस्मत में काफी सुधार कर सकते हैं। वित्त, रोमांस और शिक्षा के क्षेत्रों में सफलता मिलेगी।

Sankashthi Chaturthi- संकष्टी चतुर्थी पर करें विघ्नहर्ता गणेश की पूजा, ये है पूजा का शुभ मुहूर्त और विधि

Sankashthi chaturthi

Sankashthi Chaturthi- merikundli.com

संकष्टी चतुर्थी के दिन भगवान गणेश की पूजा और व्रत किया जाता है | मान्यता है कि संकष्टी Sankashthi chaturthi पर भगवान गणेश की पूजा और व्रत रखने से भक्तों के जीवन से सभी विपद दूर होती हैं और उन्हें सुख-शांति मिलती है | मार्गशीर्ष माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को संकष्टी चतुर्थी Sankashthi Chaturthi मनाई जाती है |

हिंदू पंचांग के अनुसार मार्गशीर्ष माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी chaturthi तिथि को संकष्टी चतुर्थी मनाई जाती है | इसे गणापती या गणाधिप संकष्ठी चतुर्थी भी कहा जाता है | इस दिन भगवान गणेश की पूजा की जाती है और व्रत रखा जाता है | Yantra

Importance Of Sankashthi Chaturthi-

इस व्रत का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है | गणाधिप snkashthi caturthi व्रत करने से भक्तों के जीवन में आने वाली हर समस्या दूर होती है और सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं |

मान्यता है कि इस व्रत को करने से विघ्नहर्ता श्री गणेश किसी भी कार्य में आ रही रुकावट को दूर करते हैं | साथ ही सुख-शांति और समृद्धि का आशीर्वाद देते हैं | इस दिन चंद्रमा की भी पूजा की जाती है और रात में चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद ही व्रत खोला जाता है |

Sankashthi Chaturthi- संकष्टी चतुर्थी की पूजा का शुभ मुहूर्त

चतुर्थी तिथि 11 नवंबर 2022 रात आठ बजकर 17 मिनट से लगी है और ये 12 नवंबर 2022 को रात 10 बजकर 25 मिनट तक रहेगी | संकष्टी चतुर्थी की पूजा के लिए शुभ मुहूर्त सुबह आठ बजकर दो मिनट से लेकर सुबह नौ बजकर 23 मिनट तक रहेगा | इसके अलावा दोपहर एक बजकर 26 मिनट से लेकर शाम चार बजकर आठ मिनट तक भी पूजा के लिए उत्तम समय है | merikundli.com

चंद्रोदय का समय-

Sankashthi Chaturthi के दिन भगवान ​गणेश जी का पूजन किया जाता है और दिन भर व्रत रखा जाता है | इसके बाद रात को चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद व्रत खोला जाता है | इस बार गणाधिश संकष्टी चतुर्थी के दिन रात को 8 बजकर 21 मिनट पर चंद्रोदय होगा |

संकष्टी चतुर्थी Sankashthi Chaturthi पूजन विधि-

  • संकष्टी चतुर्थी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि करें. इसके बाद मंदिर की सफाई करें |
  • मंदिर में एक चौकी पर लाल या पीले रंग का कपड़ा बिछाएं और उस पर भगवान गणेश की मूर्ति स्थापित करें |
  • फिर हाथ में जल लेकर व्रत का संकल्प करें और पूजा शुरू करें | अक्षत, धूप-दीप जलाएं और फिर भगवान गणेश की आरती करें |
  • व्रत की कथा पढ़ना ना भूलें. पूजन में गणेशजी को तिल, गुड़, लड्डू, दूर्वा और चंदन चढ़ाएं | दिन भर व्रत रखने के बाद चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद व्रत खोलें |
  •  इस दिन व्रती लोग केवल फलाहार ही ले सकते हैं | रात में चंद्रमा को अर्घ्य देकर गणेश जी का भोग निकालें और व्रत खोलें |    Know More…..

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करवा चौथ 2022 कब है? पूजा-विधि, शुभ मुहूर्त।

Karva Chauth Why, How, and When? Let's know its history

जानिए करवा चौथ का इतिहास, पूजा करने का तरीका और 2022 में शुभ मुहूर्त।

करवा चौथ 2022 उत्तर भारत में व्यापक रूप से मनाया जाएगा, मुख्य रूप से हिंदू भारतीय विवाहित महिलाएं। लेकिन एक अकेली लड़की भी इसे जल्दी बनाए रख सकती है। दिन भर चलने वाले इस आयोजन को अत्यंत उत्साह और समर्पण के साथ मनाया जाता है।  इस दिन को करवा चौथ व्रत के रूप में जाना जाने वाला एक उपवास अनुष्ठान पूरे दिन मनाया जाता है। अपने पति की सुरक्षा और लंबी उम्र तक, विवाहित महिलाएं इस दिन सूर्योदय से चंद्रोदय तक कठोर उपवास रखती हैं।

करवा चौथ 2022 कब है?

हिंदू कैलेंडर कार्तिक माह में कृष्ण पक्ष चतुर्थी को करवा चौथ व्रत के उत्सव की तारीख देता है। भारत में हिंदू कैलेंडर भविष्यवाणी करता है कि करवा चौथ 13 अक्टूबर 2022 को मनाया जाएगा।

करवा चौथ शुभ मुहूर्त
इस वर्ष 13 अक्टूबर, गुरुवार के करवा चौथ पर्व मनाया जाएगा। यहां मौजूद है इसके आरंभ और समापन का शुभ मुहूर्त-

चतुर्थी तिथि प्रारम्भ – अक्टूबर 13, 2022 को 01:59 मध्यरात्रि

चतुर्थी तिथि समाप्त – अक्टूबर 14, 2022 को 03:08 मध्यरात्रि

करवा चौथ पूजा मुहूर्त – शाम 05:54 से शाम 07:09 तक

व्रत समय – शाम 06:20 से रात 08:09 बजे तक

चंद्रोदय का समय – रात 08:09 बजे

पूजा-विधि

इसी तरह करवा चौथ का सम्मान करते समय पूर्ण संस्कार का पालन करना चाहिए। इसके लिए व्रत रखने वाली विवाहित महिलाओं को सुबह जल्दी उठकर स्नान करना चाहिए और फिर साफ कपड़े पहनकर मंदिर में मोमबत्ती जलाना चाहिए। इस दौरान निर्जला व्रत का व्रत करना चाहिए और देवताओं, विशेष रूप से भगवान शिव और भगवान गणेश की पूजा करनी चाहिए।रात के समय चंद्रोदय के बाद व्रत में चंद्रमा की पूजा की जाती है। चंद्र दर्शन के बाद पति को छलनी से देखा जाता है। अंत में पति द्वारा पत्नी को पानी पिलाकर व्रत को तोड़ा जाता है।

उपयोगी धार्मिक सामग्री

महिलाओं को पूजा के लिए कुछ चीजें जैसे चंदन, शहद, अगरबत्ती, फूल, कच्चा दूध, चीनी, घी, दही, मिठाई, गंगाजल, अक्षत (चावल), सिंदूर, मेहंदी, महावर, कंघा, बिंदी, चुनरी लाना आवश्यक है। , चूड़ी, बिछुआ, चोंच वाले ढक्कन वाला मिट्टी का घड़ा, दीया, रूई, कपूर, गेहूँ, चीनी का चूर्ण, हल्दी, पानी का कटोरा, पीली मिट्टी दरअसल, पूजा सामग्री में सुहागन के सभी संकेत शामिल हैं।

इसका महत्व

वहीं करवा चौथ का पर्व ढलते चंद्र पखवाड़े के चौथे दिन मनाया जाता है, जिसे कृष्ण पक्ष के नाम से भी जाना जाता है। यह हिंदू कैलेंडर के अनुसार कार्तिक महीने में आता है। इस शुभ अवसर पर अविवाहित युवतियां भी अपने मंगेतर या मनचाहे पति के लिए व्रत रखती हैं। अलग-अलग राज्यों में इसके अलग-अलग नाम मौजूद हैं। लेकिन त्योहार के दौरान पालन किए जाने वाले महत्व और परंपराएं लगभग सभी जगहों पर एक जैसी हैं।

इसी के साथ करवा चौथ अक्सर संकष्टी चतुर्थी के साथ मेल खाता है, जो भगवान गणेश के लिए मनाया जाने वाला उपवास का दिन है। इस दिन विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र की कामना के लिए भगवान शिव की पूजा करती हैं। इस दिन भगवान गणेश और उनके परिवार सहित भगवान शिव की पूजा की जाती है

करवा चौथ का इतिहास

मैं आपको बता दूं कि करवा चौथ दो शब्दों से मिलकर बना है: चौथ, जो चार को इंगित करता है, और करवा, जो मिट्टी के तेल की रोशनी को दर्शाता है। हिंदू कैलेंडर के कार्तिक महीने के चौथे दिन करवा चौथ मनाया जाता है। जब दोस्त और परिवार त्योहार मनाने और सम्मान करने के लिए एक साथ जुड़ते हैं, तो यह साल का एक बेहद लोकप्रिय समय होता है। दिवाली एक उत्सव है जो करवा चौथ के लगभग नौ दिन बाद मनाया जाता है।
इसका उपयोग शुरू में दुल्हन और उसके ससुराल वालों के बीच गठबंधन का जश्न मनाने के लिए किया जाता था, लेकिन समय के साथ अनुष्ठान बदल गया है। आजकल इसका पति की लंबी उम्र और लाभकारी स्वास्थ्य के लिए भगवान से आशीर्वाद लेने के लिए मनाया जाता है।

करवा चौथ व्रत के रूप में क्यों मनाया जाता है?

इसके साथ ही यह त्योहार एक उपवास अवकाश है जिसे पति और पत्नी के बीच प्रेम का प्रतीक करने के लिए बहुत उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। इस दिन पूरे देश में इस दिन धूमधाम से मनाया जाता है। महिलाओं ने यह व्रत अपने पति की आयु के लिए प्राचीन काल से किया है। हालांकि पूर्व में यह भी माना जाता था कि इस व्रत का उद्देश्य विवाहित महिलाओं और उनके ससुराल वालों के बीच संबंध सुधारना है।

यह किसके द्वारा शुरू किया गया था?

अपनी जरूरत की घड़ी में, द्रौपदी ने अपने साथी भगवान कृष्ण के बारे में सोचा और मदद की गुहार लगाई। तब भगवान कृष्ण ने उन्हें याद दिलाया कि जब देवी पार्वती ने पहले भी इसी तरह की स्थिति में भगवान शिव से सलाह मांगी थी, तो शिव ने सुझाव दिया था कि वह इस व्रत का पालन करें।

इस दिन चंद्रमा की पूजा क्यों की जाती है?

इसी प्रकार करवा चौथ का चंद्रमा हिंदू कैलेंडर के अनुसार कार्तिक महीने में मनाया जाता है। इस चंद्रमा को भगवान शिव और उनके पुत्र भगवान गणेश का रूप माना जाता है। इस दिन चंद्रमा की पूजा करने का अर्थ है कि देवताओं की पूजा की जा रही है।

इस दिन चंद्रमा न दिखे तो क्या करें?

इस दिन, यदि चंद्रमा दिखाई नहीं दे रहा है, तो महिलाएं शिव भगवान पर स्थित चंद्रमा की पूजा कर सकती हैं। आप एक साथ उनसे क्षमा मांग सकते हैं और शुद्धतम तरीके से अपना उपवास शुरू कर सकते हैं। करवा चौथ के न दिखने पर महिलाएं भी चंद्रमा का आह्वान कर सकती हैं और इस रात को व्रत परंपरा के अनुसार पूजा कर सकती हैं। महिलाएं अपना व्रत तोड़ सकती हैं, देवी लक्ष्मी की पूजा कर सकती हैं और फिर अपना व्रत समाप्त कर सकती हैं।https://merikundli.com/

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